हम रा हैं। हम आपका स्वागत एक अनंत रचयिता के प्रेम और रोशनी में करते हैँ। अब हम संवाद करते हैं।
39.1प्रश्नकर्ता
यह उपकरण सोच रही थी कि क्या उसकी नाजुक भावना लगभग छह हफ्ते पहले किए गए रासायनिक सेवन के कारण है?
रा
हम रा हैं। यह सही है। यह उपकरण अब शारीरिक-समूह की दुर्बलता/विकृति की सबसे तीव्र अवस्था से गुजर रही है, जो दो बार लिए गए रासायनिक सेवन के दोहरे प्रभावों के कारण है। यह उपकरण अपेक्षा कर सकती है कि यह चरम स्थिति आपके पंद्रह से बीस दैनिक चक्रों तक बनी रह सकती है। दुर्बलता की विकृतियाँ फिर धीरे-धीरे हटने लगेंगी, हालांकि, इस उपकरण की लगातार बनी हुई दुर्बलता की विकृतियों के कारण यह उतनी तेजी से नहीं होगा जितना हमने पहले सोचा था।
यह उपकरण बहुत सौभाग्यशाली है कि इसके पास एक सहायक समूह है जो इस समय इन सत्रों के संबंध में आवश्यक सावधानी बरतने पर दृढ़ता से जोर देता है। यह उपकरण मानसिक/भावनात्मक समूह और आध्यात्मिक समूह को उस शुद्धता के स्तर तक लगभग तुरंत ही शुद्ध करने में सक्षम है जिसकी इस कार्य के लिए आवश्यकता है, लेकिन सेवा के प्रति निष्ठा के संबंध में इस उपकरण की विकृति के कारण यह शारीरिक समूह की दुर्बलता से जुड़ी विकृतियों के संदर्भ में अपनी निर्णय क्षमता का सर्वोत्तम उपयोग नहीं कर पाती है। इस प्रकार हम ऐसे स्थान/समयों में आपकी सहायता की सराहना करते हैं जैसे कि आपने हाल ही में कार्य न करने का जो निर्णय लिया था। यह एक उपयुक्त निर्णय था, और इस उपकरण को दी गई मार्गदर्शन सहायक सिद्ध हुई।
39.2प्रश्नकर्ता
क्या ऐसा कुछ और है जो यह उपकरण कर सकती है, जो वह अपनी वर्तमान प्रयासों के अतिरिक्त कर सकती है, ताकि उसकी अवस्था में शीघ्र सुधार हो सके? मुझें पता है कि पिछले कुछ दिनों से वह पैर की समस्या के कारण व्यायाम नहीं कर सकी है… चल-फिर नहीं पाई है, लेकिन हम फिर से उस स्थिति में लौटने की आशा कर रहे हैं। क्या ऐसा कुछ और है जो वह कर सकती है?
रा
हम रा हैं। जैसा कि हमने संकेत किया है, इस समय नकारात्मक इकाईयाँ इस उपकरण को कमजोर करने के लिए पूरे ज़ोर-शोर से प्रयास कर रही हैं। यही पहले बताई गई पैर की अंगुली में उत्पन्न समस्या का कारण है। यह सौभाग्य की बात है कि इस अवधि के दौरान यह उपकरण एक अनंत रचयिता की उपासना में पवित्र गीतों के कंपनता समूहों के माध्यम से पूरी तरह शामिल रहेगी। अधिक सक्रिय शारीरिक जीवन, व्यायाम की गतिविधियों में और यौन अर्थ में, दोनों ही रूपों में सहायक होती हैं। हालाँकि, इस उपकरण की उन विकृतियों की आवश्यकताएँ जिन्हें आप नैतिकता कह सकते हैं, बाद की गतिविधि पर असर डालती हैं।
एक बार फिर, यह सौभाग्य की बात है कि इस उपकरण को प्रेमपूर्ण सामाजिक मेलजोल के अवसर प्राप्त हैं जो वास्तव में लाभकारी हैं। मूल रूप से, आपके तीसरी-घनत्वता के निरंतरता में, यह समय का ही विषय है।
39.3प्रश्नकर्ता
उपकरण की स्थिति के आपके मूल्यांकन से क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि हमारे भविष्य के सत्रों में हम कितनी बार और कितनी अवधि तक इन सत्रों को आयोजित करने की योजना बना सकते हैं?
रा
हम रा हैं। यह सवाल उल्लंघन की सीमा पर है। दी गई जानकारी काफी हद तक अनुसरण करने योग्य दिशा-निर्देश निर्धारित करती है। हालाँकि, हमें यह ज्ञात है कि आपमें से प्रत्येक इस उपकरण की आभा को नहीं पढ़ सकता है और इसलिए शारीरिक समूह की स्थितियों को नहीं देख सकता है, बल्कि स्वयं यह उपकरण भी अपनी सेवा की इच्छा पर निरंतर निर्भर रहने के कारण अपने शारीरिक समूह की सटीक विकृत-स्थिति को भेद पाने में पर्याप्त कठिनाई अनुभव करती है।
इसलिए, हमारा मानना है कि यदि हम यह संकेत दें कि हर दूसरे दिन प्रातःकालीन समय में एक सत्र करना सबसे उपयुक्त है तो हम उल्लंघन नहीं कर रहे हैं, साथ ही यदि उचित समझा जाए तो जिस प्रातःकालीन अवधि में कोई सत्र नियोजित नहीं है उसमें एक संक्षिप्त सत्र किए जाने की संभावना भी हो सकती है। यह न केवल इस समय अवधि में बल्कि सामान्य रूप से भी लागू होता है।
39.4प्रश्नकर्ता
तो अब मैं सामान्य पूछताछ जारी रखूंगा, पूछताछ के इस सिलसिले में रास्ता खोजने का प्रयास करूंगा जो हमें उन स्थाई क्रियाओं की समझ की ओर ले जाएँ, जिन पर हम और अन्य लोग कार्य कर सकते हैं, ताकि अपनी चेतना को ऊँचा उठाया जा सके, और इस सवाल के जवाब ढूंढ़ने के प्रयास में मुझसे कुछ गलतियाँ हो सकती हैं। यदि मेरे सवाल किसी भी तरह से भ्रम पैदा करें, तो मैं पहले ही क्षमा चाहता हूँ।
मैंने गौर किया है कि हर चीज़—या अधिकतर मूलभूत चीज़ें—ऐसी यूनिट्स में विभाजित होती हैं जिनकी कुल संख्या सात होती है। हेनरी पुहारिक द्वारा द नाइन के एक प्रतिलिपि का अध्ययन करते हुए, मुझे द नाइन द्वारा दिया गया एक कथन मिला जिसमें वे कहते हैं “यदि हमें मानव शरीर के विद्युत समतुल्य का सात गुना प्राप्त हो जाए, तो परिणामस्वरूप विद्युत का द्रव्यमान सैवनॉन हो जाएगा।” क्या आप इसे समझा सकते हैं?
रा
हम रा हैं। इसे स्पष्ट करना आपकी भाषा की क्षमताओं से परे है। फिर भी, हम इस अवधारणा को संबोधित करने का एक प्रयास करेंगे।
जैसा कि आप अवगत हैं, प्रत्येक लोगोस द्वारा स्थापित की गई सृष्टियों की शुरुआत में, पूर्ण संभावनाओं की रचना होती है, दोनों प्रकार की विद्युतीय (जिसे आप ‘लार्सन’ कहते हैं उसके अर्थ में) और आध्यात्मिक। इस बयान को समझने के लिए, हम कहेंगे, यह आध्यात्मिक विद्युत उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि विद्युत की अवधारणा।
जैसा कि आप अवगत हैं, यह अवधारणा, संभावित ऊर्जा से संबंधित है। कहा गया है कि इलेक्ट्रॉन का कोई द्रव्यमान नहीं होता केवल एक क्षेत्र होता है। अन्य लोग इसे अनंत रूप से सूक्ष्म माप वाले द्रव्यमान के रूप में मानने का दावा करते हैं। दोनों ही सही हैं। संभावित ऊर्जा का वास्तविक द्रव्यमान उस क्षेत्र की शक्ति में निहित होता है। यह आध्यात्मिक रूप में भी सही है।
हालाँकि, आपकी वर्तमान भौतिक ज्ञान प्रणाली में यह उपयोगी है कि इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान संख्या लेकर आप उस पर कार्य करें ताकि आप भौतिक ब्रह्मांड से संबंधित अन्य सवालों के जवाब खोज सकें। ठीक इसी प्रकार, आप सहज रूप से यह मान सकते हैं कि प्रत्येक घनत्वता के अस्तित्व का एक बढ़ता हुआ आध्यात्मिक द्रव्यमान होता हैं। द्रव्यमान, हम कह सकते हैं, काफ़ी हद तक बढ़ता है, लेकिन अत्यधिक नहीं, जब तक कि प्रवेश द्वार की घनत्वता तक नहीं पहुँचा जाता। इस घनत्वता में समीक्षा की जाती है, पीछे मुड़कर देखा जाता है—संक्षेप में, ध्रुवीयता से जुड़ी सभी उपयोगी प्रक्रियाओं का उपयोग हो चुका होता है। इसलिए, व्यक्ति की आध्यात्मिक विद्युतीय प्रकृति आध्यात्मिक द्रव्यमान में निरंतर अधिक और अधिक बढ़ती जाती है।
एक उदाहरण के तौर पर आप उस व्यक्ति के कार्य को देख सकते हैं जिसे अल्बर्ट के नाम से जाना जाता है, जो यह सिद्धांत प्रस्तुत करता है कि जैसे-जैसे कोई द्रव्यमान प्रकाश की गति के निकट पहुँचता है उसका द्रव्यमान अनंत की ओर बढ़ता है। इसी प्रकार सातवीं-घनत्वता का अस्तित्व, संपूर्ण हो चुका अस्तित्व, वह रचयिता है जो स्वयं को जान चुका है, वह द्रव्यमान को संचित करता है और पुनः एक बार संघनित होकर उसी एकमात्र रचयिता में विलीन हो जाता है।
39.5प्रश्नकर्ता
तो इस पेज पर जो समीकरण मेरे पास है, उसमें Mᵢ का अर्थ आध्यात्मिक द्रव्यमान से है, ऐसा मैं मान रहा हूँ। क्या यह सही है?
Mᵢ = (m₀C²) / √(1 - v² / c²)
रा
हम रा हैं। यह सही है।
39.6प्रश्नकर्ता
धन्यवाद। क्या आप मुझे बता सकते हैं— क्या आप द नाइन द्वारा दी गई उस प्रसारण की व्याख्या कर सकते हैं जिसमें वे कहते हैं, “CH एक सिद्धांत है जो ज्ञान और नियम को उजागर करने वाला सिद्धांत है”? क्या आप मुझे बता सकते हैं कि यह सिद्धांत क्या है?
रा
हम रा हैं। उस बयान में जो सिद्धांत अत्यंत अप्रत्यक्ष रूप से छिपा हुआ है, वह दरअसल स्थायी (या रचयिता) और अस्थायी (या अवतरित जीव) का एक सरल सिद्धांत है और इन दोनों के मध्य प्रेम और रोशनी में एक-दूसरे के लिए जो गहरा आकर्षण विद्यमान है, वह स्वतंत्र इच्छा की विकृतियों के बीच भ्रम-बंधित इकाई पर प्रभाव डाल रहा होता है।
39.7प्रश्नकर्ता
क्या यही कारण था कि द नाइन ने इस सिद्धांत को इस रूप में प्रसारित किया—क्या इसका कारण पहली विकृति थी?
रा
हम रा हैं। यह गलत है।
39.8प्रश्नकर्ता
तो क्या आप मुझे बता सकते हैं कि उन्होंने इस सिद्धांत को फिर इतने रहस्यमय रूप में क्यों प्रस्तुत किया?
रा
हम रा हैं। लेखक पहेलियों और समीकरणों में अत्यधिक रुचि रखता है।
39.9प्रश्नकर्ता
अच्छा ऐसा है। द नाइन स्वयं को “ईश्वर के नौ प्रमुख प्रतिनिधि” कहते हैं। क्या आप बता सकते हैं कि उनका इससे क्या अभिप्राय है?
रा
हम रा हैं। यह भी एक अप्रत्यक्ष रूप से छिपा हुआ बयान है। यह संकेत देने का प्रयास किया गया है कि महासभा में जो नौ उपस्थित हैं, वे रचयिता, एकमात्र रचयिता, का प्रतिनिधित्व करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे किसी न्यायालय में नौ गवाह एक ही मुलज़िम के पक्ष में गवाही दे रहे हों। प्रिंसिपल शब्द का यह अर्थ भी होता है।
इस सामग्री के बहुत से भागों में लेखक की इच्छा को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है जिसने इसकी प्रस्तुति की शैली को प्रभावित किया है, ठीक वैसे ही जैसे इस समूह की क्षमताएँ और प्राथमिकताएँ इस संपर्क की प्रकृति को निर्धारित करती हैं। अंतर इस तथ्य में निहित है कि हम जैसे हैं वैसे ही हैं। इस प्रकार हम या तो अपनी इच्छानुसार बोल सकते हैं या बिल्कुल भी नहीं बोल सकते। इसके लिए, हम कहेंगे, एक अत्यंत सामंजस्यपूर्ण समूह की आवश्यकता होती है।
39.10प्रश्नकर्ता
मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि हमारे विकास की खोज के लिए एक उपजाऊ क्षेत्र उन शारीरिक ऊर्जा केंद्रों के विकास को समझने में है, क्योंकि ये सातों केंद्र उन सभी सातों से जुड़े प्रतीत होते हैं जिनका मैंने पहले उल्लेख किया था और ये हमारे स्वयं के विकास के केंद्र में भी हैं।
क्या आप इन शारीरिक ऊर्जा केंद्रों के विकास की प्रक्रिया का वर्णन कर सकते हैं, जो जीवन के सबसे प्रारंभिक रूप से शुरू होती है?
रा
हम रा हैं। इस विषय पर पहले भी कुछ हद तक चर्चा की जा चुकी है। इसलिए, हम उन जानकारियों को दोहराएंगे नहीं जो यह बताती हैं कि पहली और दूसरी घनत्वता में कौन-कौन सी किरणें स्थित होती हैं और ऐसा क्यों है बल्कि इस जानकारी को और अधिक विस्तार देने का प्रयास करेंगे।
विकास के प्रत्येक स्तर के मूल केंद्रीय बिंदुओं—अर्थात, दूसरी के आगे की प्रत्येक घनत्वता—को निम्न रूप में देखा जा सकता है:
सबसे पहले, तथाकथित लाल किरण की आधारभूत ऊर्जा है। इस किरण को प्रत्येक घनत्वता के लिए मूलभूत रूप से सशक्त करने वाली किरण के रूप में समझा जा सकता है। इसे आध्यात्मिक विकास के लिए कभी भी कम महत्वपूर्ण या फलदायक समझकर तुच्छ नहीं आँकना चाहिए, क्योंकि यही आधारशिला किरण है।
अगली आधारभूत किरण पीली है। यह महान प्रारंभिक आधार की किरण है। इसी किरण पर मन/शरीर अपनी पूर्ण संतुलित क्षमता तक पहुँचता है। लाल/नारंगी/पीली की तिकड़ी इकाई को हरे रंग की केंद्रीय किरण तक छलाँग लगाने के लिए आधार प्रदान करती है। फिर भी यह एक आधारभूत किरण है परंतु मुख्य किरण नहीं है।
यह आध्यात्मिक कार्य के लिए एक संसाधन है। जब हरी किरण सक्रिय हो जाती है तब हम पाते हैं कि तीसरी प्राथमिक किरण अपनी क्षमता को सक्रिय करना प्रारंभ करने में सक्षम होती है। यह पहली वास्तविक आध्यात्मिक किरण है क्योंकि इस स्तर पर होने वाले सभी स्थानांतरण एक एकीकृत मन/शरीर/आत्मा प्रकृति के होते हैं। नीली किरण प्रत्येक घनत्वता में आत्मा की सीखने/सीखाने को मन/शरीर समूह में स्थापित करती है, संपूर्ण अस्तित्व को सक्रिय करते हुए, इस सम्पूर्णता के भाव को दूसरों तक पहुँचाती है।
इंडिगो किरण, यद्यपि अत्यंत मूल्यवान है, वह किरण है जिस पर केवल कोई माहिर ही काम कर सकता है, जैसा कि आप इसे कहेंगे। यह अनंत बुद्धिमानिता का प्रवेशद्वार है जो बुद्धिमान ऊर्जा को प्रवाहित करता है। यह वही ऊर्जा केंद्र है जिस पर उन शिक्षाओं में काम किया जाता है जिन्हें आंतरिक, गुप्त और रहस्यमय माना जाता है, क्योंकि यह किरण वह है जिसकी अंनत संभावनाएं है। जैसा कि आप जानते हैं, जो लोग हीलिंग करते हैं, सिखाते हैं, और किसी भी रूप में ऐसे रचयिता के लिए कार्य करते हैं जो दोनों प्रकाशमान और संतुलित प्रतीत होते हैं, वही सभी गतिविधियाँ इंडिगो किरण से संबंधित होती हैं।
जैसा कि आप जानते हैं, बैंगनी किरण स्थिर होती है और किरणों की सक्रियता के कार्यों की चर्चा में शामिल नहीं होती क्योंकि यह किसी इकाई की छाप, छवि, पहचान और सच्ची कंपनता होती है।
39.11प्रश्नकर्ता
थोड़ा और स्पष्ट करने के लिए मैं यह सवाल पूछना चाहूँगा, कि यदि हमारे पास एक अत्यधिक ध्रुवीकृत इकाई है जो दूसरों की सेवा के प्रति ध्रुवीकृत हो, और एक अन्य अत्यधिक ध्रुवीकृत इकाई है जो स्वयं की सेवा के प्रति ध्रुवीकृत हो, तो क्या होगा… यदि हम प्रत्येक किरण को लें, लाल से शुरू करते हुए, तो क्या इन दोनों इकाइयों की लाल किरण में कोई अंतर होगा?
रा
हम रा हैं। यह इस सत्र का आख़िरी पूरा सवाल होगा।
लाल किरण के संबंध में समान रूप से मजबूत ध्रुवीकृत सकारात्मक और नकारात्मक इकाइयों के बीच कोई अंतर नहीं है।
39.12प्रश्नकर्ता
क्या यह अन्य सभी किरणों के लिए भी सत्य है?
रा
हम रा हैं। हम संक्षेप में जवाब देंगे। आप आगे किसी अगले सत्र में सवाल पूछ सकते हैं।
नकारात्मक किरण के पैटर्न मे लाल/नारंगी/पीली सीधे नीली किरण में जाते है, इसका उपयोग केवल अनंत बुद्धिमानिता से संपर्क करने के लिए किया जाता है।
सकारात्मक रूप से झुकाव वाले इकाइयों में यह विन्यास संतुलित, क्रिस्टल-जैसा स्पष्ट और सात किरणों के वर्णन के अनुसार होती है।
क्या इस उपकरण को छोड़ने से पहले कोई छोटा सवाल हैं?
39.13प्रश्नकर्ता
मैं केवल यह जानना चाहता हूँ कि क्या हम ऐसा कुछ कर सकते हैं जिससे इस उपकरण को अधिक आराम मिले या संपर्क में सहायता हो?
रा
हम रा हैं। आप अत्यंत जागरूक और समर्पित हैं। सब कुछ ठीक है। मैं आपको, मेरे मित्रों, एकमात्र अनंत रचयिता के प्रेम और रोशनी में छोड़ता हूँ। अतः आगे बढ़िए, एक रचयिता की शक्ति और शांति में आनंदित होते हुए। अडोनाई।